Posted By harish
सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की राजनीती हमेशा-हमेशा कर लिए ख़त्म हो जाएगी अगर ये सीक्रेट प्लान…

लोकसभा चुनाव अगले साल 2019 में होने वाले है मगर इनको लेकर चर्चा और तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी है| हर बार की तरह इस बार भी चुनावों में दो ही पार्टियों के नाम सबसे चर्चित है – भाजपा और कांग्रेस| जहाँ एक तरफ भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों और लोकप्रियता पर निर्भर कर रही है वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिशों में लगी हुई है|

कांग्रेस ने राहुल गाँधी को अध्यक्ष पद सौंप दिया ताकि गाँधी परिवार का भी अस्तित्व बचा रहे मगर राहुल पार्टी को आगे ले जाने में असफल रहे है| राज्य चुनावों में लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस अब 2019 के चुनावों के लिए दूसरी विपक्षी पार्टियों का सहारा लेकर PM मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा से टक्कर लेने की कोशिश कर रही है|

मगर हर बार की तरह इस बार भी ‘चाणक्य’ अमित शाह कांग्रेस और सारे विपक्षियों को धुल चटाने के लिए अपने ‘प्लान’ के साथ तैयार है और वाकई लगता है कि इस बार भी उनका प्लान काम कर जायेगा और कांग्रेस को फिर से खाली हाथ लौटना पड़ेगा|

भारतीय जनता पार्टी ने 2019 लोकसभा चुनाव जीतने के लिए एक सीक्रेट प्लान तैयार किया है। इस प्लान को लागू कराने के लिए भाजपा ने पार्टी के चुनिंदा नेताओं को जिम्मेदारी भी सौंप दी है। भाजपा उन 90 सीटों को जीतने पर जोर दे रही है, जहां पिछले चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रही थी। इसके लिए डेढ़ दर्जन केंद्रीय मंत्रियों एवं वरिष्ठ नेताओं को पांच-पांच सीटों का ‘पालक’ बनाकर अभियान चलाया जाएगा।

बीजेपी अब वर्ष 2014 में जीती 283 सीटों के अलावा उन 90 सीटों पर जोर दे रही है, जिन पर वह 2014 में दूसरे स्थान पर रही थी। पार्टी का ध्यान उन 142 सीटों पर भी है, जिन पर बीजेपी को कभी जीत हासिल नहीं हुई। ये सीटें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में हैं। बीजेपी के एक नेता ने बातचीत में दावा किया कि इनमें कुछ ऐसी सीटें हैं, जहां पर पिछले चार सालों में पार्टी की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है।

इस रणनीति के तहत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इसी महीने से अलग-अलग प्रदेशों की 5-5 लोकसभा सीटों के लिए अपने दौरे शुरू किए हैं। अप्रैल के पहले हफ्ते में शाह ने उड़ीसा के दो दिन के दौरे में 5 लोकसभा सीटों को कवर किया। इन दौरों में शाह ने खास तौर पर पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने, बूथ प्रमुखों का सम्मेलन करने और रोड शो के जरिए आम लोगों से संपर्क कायम करने पर ध्यान केंद्रित किया।

इसी कड़ी में शाह ने 21 अप्रैल को उत्तरप्रदेश का दौरा किया। इस दौरे में उन्होंने रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ सीटों के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को भी उन्होंने संबोधित किया। शाह मई के दूसरे हफ्ते में राजस्थान का दौरा करेंगे, जहां हाल ही में पार्टी को लोकसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।


जमीनी एवं बूथ स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी ने ‘शक्ति केंद्रों’ का गठन करने की पहल को तेजी से आगे बढ़ाया है। इस कार्य में पन्ना प्रमुखों की खास भूमिका रखी गई है। इन 90 सीटों पर जीत दर्ज करने की योजना के तहत बीजेपी नेतृत्व ने मंत्रियों एवं वरिष्ठ नेताओं को पांच-पांच सीटों का समूह बनाकर जिम्मेदारी दी है। इन नेताओं में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, प्रकाश जावड़ेकर, मनोज सिन्हा, नरेंद्र सिंह तोमर, पी पी चौधरी, गजेन्द्र सिंह शेखावत आदि शामिल हैं।

इसके लिए ऐसे मंत्रियों का चुनाव किया गया है, जिनके पास सांगठनिक अनुभव भी है। जाहिर तौर पर ये पालक केंद्रीय योजनाओं के जरिए भी जमीन तक पहुंचने की कोशिश करेंगे और संगठनकर्ता के रूप में भी पार्टी को मजबूत बनाएंगे। काफी संख्या में सीटों के लिए प्रभारी तैनात किये जा चुके हैं।